विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026: स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने डॉ. आरएमएल अस्पताल में 'क्वालिटी एंड सेफ्टी हैंडबुक' जारी की
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने विश्व रोगी सुरक्षा दिवस के अवसर पर रोगी सुरक्षा और स्वच्छता के महत्व पर ज़ोर दिया और आयुष्मान भारत व जन औषधि योजना की उपलब्धियों को साझा किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली के अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ABVIMS) और डॉ. राम मनोहर लोहिया (RML) अस्पताल में 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026' के अवसर पर एक कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने रोगी सुरक्षा के तरीकों को बेहतर बनाने के लिए 'क्वालिटी एंड सेफ्टी हैंडबुक' जारी की। वर्ष 2026 के लिए इस दिवस की थीम "गैर-संचारी रोगों (NCDs) के लिए सुरक्षित देखभाल" और स्लोगन "जीवन के लिए सुरक्षित देखभाल!" रखा गया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि हर मरीज को सुरक्षित, उच्च-गुणवत्ता वाली और सम्मानजनक देखभाल मिलना सुनिश्चित करना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मरीज सुरक्षा के लिए डॉक्टरों, नर्सों, पैरामेडिकल स्टाफ और मरीजों के परिजनों की सामूहिक कोशिशें आवश्यक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जल्दबाजी के चक्कर में सुरक्षा प्रोटोकॉल से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री ने स्वच्छता और अस्पताल की सुरक्षा के बीच गहरा संबंध बताया। उन्होंने कहा कि साफ़-सुथरा अस्पताल ही सुरक्षित अस्पताल होता है। उन्होंने जानकारी दी कि 2015 में शुरू हुए राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन के तहत अब तक 60,000 सरकारी स्वास्थ्य केंद्र प्रमाणित हो चुके हैं, जिसे बढ़ाकर 2 लाख तक ले जाने का लक्ष्य है।
सरकारी योजनाओं की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए श्री नड्डा ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से लगभग 11.5 करोड़ लाभार्थियों को करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का इलाज मिला है। इसके अतिरिक्त, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) के जरिए नागरिकों ने दवाओं पर लगभग 45,000 करोड़ रुपये की बचत की है। उन्होंने बताया कि देश में जन औषधि केंद्रों की संख्या 20,000 से अधिक हो चुकी है, जिसे 25,000 तक बढ़ाने का प्रयास है।
मंत्री ने यह भी साझा किया कि स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाला 'आउट-ऑफ-पॉकेट' खर्च, जो 2014 में लगभग 62 प्रतिशत था, अब घटकर लगभग 43 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने गैर-संचारी रोगों जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप और कैंसर की शुरुआती स्क्रीनिंग और टीकाकरण के डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम पर भी प्रकाश डाला।
इस अवसर पर श्रीमती पुण्या सलिला श्रीवास्तव और फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव श्री मनोज जोशी ने भी अपने विचार रखे। श्रीमती श्रीवास्तव ने बताया कि ABVIMS और डॉ. आरएमएल अस्पताल ने NABH एक्रेडिटेशन हासिल किया है। कार्यक्रम के दौरान श्री नड्डा ने PM-JAY और जन औषधि परियोजना के लाभार्थियों से भी बातचीत की।
मरीजों की सुरक्षा को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य मंत्रालय का नेशनल पेशेंट सेफ्टी सेक्रेटेरिएट (NPSS) काम कर रहा है, जिसके तहत 'नेशनल एक्शन प्लान फॉर पेशेंट सेफ्टी (NAPPS) 2030' तैयार किया जा रहा है। इसमें दवा, सर्जरी, वैक्सीन और मेडिकल डिवाइस जैसे प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।



