नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'संयुक्त परिचालन समीक्षा और मूल्यांकन' कार्यक्रम 2026 संपन्न
एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय द्वारा आयोजित पांच दिवसीय इस कार्यक्रम में तीनों सेनाओं और विभिन्न मंत्रालयों के अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा की उभरती चुनौतियों और आधुनिक युद्ध प्रणालियों पर चर्चा की।

नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में 'संयुक्त परिचालन समीक्षा और मूल्यांकन (कोर) कार्यक्रम 2026' का समापन हुआ। एकीकृत रक्षा कार्मिक मुख्यालय (एचक्यू आईडीएस) द्वारा आयोजित और सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (सीईएनजेडेडब्ल्यूएस) द्वारा संचालित यह कार्यक्रम 14 से 18 सितंबर, 2026 तक चला।
इस पांच दिवसीय आयोजन में तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों पर विचार-विमर्श करना था। इस मंच के माध्यम से सैन्य और असैन्य अधिकारियों ने संयुक्तता, एकीकरण, चल रहे संघर्षों, आधुनिक युद्ध कौशल, रक्षा उत्पादन और क्षमता विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए।
चर्चाओं के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर विशेष जोर दिया गया। इसके अलावा कॉग्निटिव वॉरफेयर, रणनीतिक संचार और गलत सूचनाओं (misinformation) का मुकाबला करने वाले अभियानों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।
कार्यक्रम की एक प्रमुख विशेषता सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व का प्रतिभागियों के साथ सीधा संवाद रहा। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS), नौसेना प्रमुख और सीआईएससी ने आधुनिक युद्ध विधियों, उच्च स्तरीय निर्णय लेने की प्रक्रिया और समकालीन सुरक्षा चुनौतियों पर बातचीत की। साथ ही, वायु सेना के उप प्रमुख और थल सेना के उप-प्रमुख ने भी अधिकारियों के साथ संवाद कर अपने विचार साझा किए।
इस आयोजन में विषय-विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, विचारकों और विभिन्न सरकारी संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इस विविध भागीदारी के जरिए युद्ध के बदलते स्वरूप और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर चर्चा की गई।
इस कार्यक्रम ने रक्षा बलों, असैन्य मंत्रालयों और प्रमुख संस्थानों के बीच आपसी तालमेल और सहयोग को मजबूत करने में योगदान दिया। चर्चाओं में इस बात पर जोर दिया गया कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए कूटनीतिक, सूचना, आर्थिक और सैन्य क्षेत्रों में बेहतर समन्वय और 'समग्र राष्ट्र' (Whole-of-Nation) दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।



