प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर संस्कृति मंत्रालय ने आयोजित किया 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम
संस्कृति मंत्रालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पुराना किला में 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें सेवा और विकसित भारत के संकल्प पर जोर दिया गया।

संस्कृति मंत्रालय ने 17 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली के पुराना किला में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन के उपलक्ष्य में 'आशीर्वाद का दीया' कार्यक्रम का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत दीप प्रज्वलित कर किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि ‘आशीर्वाद का दीया’ केवल एक दीपक नहीं है, बल्कि यह लोगों के आशीर्वाद, सेवा, कृतज्ञता और विकसित भारत के संकल्प की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने भारतीय संस्कृति में दीये के महत्व को बताते हुए कहा कि यह दूसरों के जीवन में प्रकाश फैलाने और जनकल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का संदेश देता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए श्री शेखावत ने कहा कि उनका संपूर्ण सार्वजनिक जीवन राष्ट्रहित और जनसेवा के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री को एक समर्पित कार्यकर्ता, साधक, तपस्वी और संगठनकर्ता के रूप में वर्णित किया, जो सार्वजनिक पद को प्रतिष्ठा के बजाय एक जिम्मेदारी और सेवा के माध्यम के रूप में देखते हैं। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री की कार्यशैली को परिणामोन्मुखी बताते हुए कहा कि सुशासन का वास्तविक पैमाना योजनाओं का अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना और समाज पर उनका वास्तविक प्रभाव है।
श्री शेखावत ने उल्लेख किया कि 2014 के बाद भारत ने विकास और सुशासन की एक नई यात्रा शुरू की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के विजन के अनुसार 'विरासत और विकास' एक-दूसरे के पूरक हैं और संस्कृति मंत्रालय 'विकास भी, विरासत भी' के संकल्प के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय, लोक और पारंपरिक सांस्कृतिक परंपराओं का संरक्षण और संवर्धन मंत्रालय की प्राथमिकता है, क्योंकि अपनी विरासत से प्रेरित समाज ही विकसित भारत के लक्ष्य की ओर गर्व के साथ आगे बढ़ सकता है।
इसके अतिरिक्त, केंद्रीय मंत्री ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका और दुनिया का विश्वास देश के निर्णायक नेतृत्व को दर्शाता है।
कार्यक्रम के दौरान संगीत नाटक अकादमी, कथक केंद्र, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, ललित कला अकादमी और क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों के कलाकारों एवं छात्रों ने भारतीय शास्त्रीय और सांस्कृतिक परंपराओं पर आधारित प्रस्तुतियां दीं। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक रूप से 'आशीर्वाद का दीया' प्रज्वलित किया गया और अमृत काल में सेवा, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के संकल्प को दोहराया गया।



