केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने मनाया विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026, गैर-संचारी रोगों की सुरक्षित देखभाल पर दिया जोर
नई दिल्ली में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य गैर-संक्रामक रोगों (NCD) के उपचार के सभी चरणों में रोगी सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को मजबूत करना था।

भारत सरकार के केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य केंद्र (NIHFW) सभागार में 'विश्व रोगी सुरक्षा दिवस 2026' का आयोजन किया। इस वर्ष के आयोजन का विषय “गैर-संक्रामक रोगों (एनसीडी) के लिए सुरक्षित देखभाल” रखा गया, जिसका उद्देश्य एनसीडी देखभाल के सभी चरणों में रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता को सुदृढ़ करना था। इस कार्यक्रम में नीति निर्माता, स्वास्थ्य सेवा नेता, जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, चिकित्सक और विभिन्न राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक (एनएचएम) श्रीमती आराधना पटनायक ने कहा कि भारत में लगभग 63 प्रतिशत मौतें गैर-संक्रामक रोगों (NCD) के कारण होती हैं, इसलिए स्वास्थ्य सेवा वितरण में रोगी सुरक्षा एक महत्वपूर्ण घटक है। उन्होंने जोर दिया कि रोगी सुरक्षा केवल एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे पूरी स्वास्थ्य प्रणाली में, विशेषकर एनसीडी की रोकथाम, निदान और उपचार में समाहित किया जाना चाहिए।
श्रीमती पटनायक ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए बताया कि NFHS-6 के आंकड़ों के अनुसार, 96 प्रतिशत टीकाकरण और 90.6 प्रतिशत संस्थागत प्रसव सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के माध्यम से हो रहे हैं। उन्होंने मार्च 2027 तक आयुष्मान आरोग्य मंदिर-उप स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-SHCs) के 100 प्रतिशत NQAS प्रमाणीकरण का लक्ष्य प्राप्त करने और उसके बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (AAM-PHCs) के लिए रोडमैप तैयार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के दौरान एक 'राष्ट्रीय रोगी सुरक्षा प्रतिज्ञा' दिलाई गई, जिसमें सभी हितधारकों ने सुरक्षित स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई। इसके बाद आयोजित तकनीकी सेमिनार में विशेषज्ञों ने डिजिटल स्वास्थ्य के उपयोग, नैदानिक प्रक्रियाओं में सुरक्षा और दवा सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की।
इस अवसर पर विभिन्न राज्यों के नवाचारों को भी साझा किया गया, जिसमें झारखंड का वृद्धावस्था मधुमेह और उच्च रक्तचाप स्क्रीनिंग मॉडल, केरल की 'हृदयरागम' पहल और राजस्थान का 'SETU' ऑनलाइन रेफरल एप्लिकेशन शामिल थे। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव (नीति) श्री सिबिन सी., एनएचएसआरसी की कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) प्रज्ञा शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। गौरतलब है कि विश्व स्वास्थ्य सभा के निर्णय के बाद हर साल 17 सितंबर को विश्व रोगी सुरक्षा दिवस मनाया जाता है।



