हैदराबाद: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दक्षिणी राज्यों के कृषि सम्मेलन में किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा पर दिया जोर
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित करते हुए खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका और पोषण सुरक्षा को कृषि के तीन मुख्य लक्ष्य बताया।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने हैदराबाद में दक्षिणी राज्यों के लिए आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलन को संबोधित किया। इस सम्मेलन में क्षेत्र में कृषि के समक्ष मौजूद चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा की गई, जिसमें अल नीनो का प्रभाव, फसल विविधीकरण और आगामी रबी मौसम के लिए आवश्यक उपायों पर विचार-विमर्श हुआ।
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार का मार्गदर्शक सिद्धांत 'राष्ट्र प्रथम' है और केंद्र किसी राज्य में किसी विशेष राजनीतिक दल की सरकार होने के आधार पर कृषि मुद्दों को नहीं देखता। उन्होंने कहा कि मुख्य उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ऐसे समाधान खोजना है जिससे किसानों के जीवन में सुधार लाया जा सके।
तकनीकी प्रगति पर चर्चा करते हुए मंत्री ने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), मशीन लर्निंग और रोबोटिक्स जैसी प्रौद्योगिकियां दुनिया को बदल सकती हैं, लेकिन कृषि अपरिहार्य रहेगी। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मशीनें रोटी बना सकती हैं, लेकिन गेहूं नहीं उगा सकतीं, इसलिए किसान केवल 'अन्नदाता' ही नहीं बल्कि 'जीवनदाता' भी हैं।
श्री चौहान ने भारतीय कृषि के तीन प्रमुख उद्देश्यों को रेखांकित किया: 1. 140 करोड़ से अधिक की आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना ताकि भारत अपनी आवश्यकताओं के लिए दुनिया पर निर्भर न रहे। 2. किसानों की आजीविका को सुरक्षित करना और उनकी आय बढ़ाना। 3. पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना ताकि लोगों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध हो सके।
दक्षिण भारत की विशिष्टताओं पर बात करते हुए उन्होंने मसालों, कॉफी, काजू, कोको और चंदन जैसी बागवानी फसलों की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत का नारियल निर्यात एक वर्ष में 4,349 करोड़ रुपये से बढ़कर 7,038 करोड़ रुपये हो गया है, जो 62 प्रतिशत की वृद्धि है। उन्होंने पुराने नारियल बागानों के पुनरुद्धार और नए पौधरोपण की रणनीति बनाने का आह्वान किया।
क्षेत्रीय सम्मेलनों के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अलग-अलग राज्यों की भौगोलिक और जलवायु परिस्थितियां अलग होती हैं, इसलिए एक समान योजना के बजाय क्षेत्र-विशिष्ट दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने राज्य सरकारों से पुराने पड़ चुके अधिनियमों और प्रक्रियाओं की समीक्षा करने का आग्रह किया ताकि नियमों को लोगों के लिए बोझ बनाने के बजाय सेवा का माध्यम बनाया जा सके।
वैश्विक बाजार के संदर्भ में उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए गए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) से भारतीय कृषि उत्पादों के लिए नए अवसर खुले हैं। उन्होंने किसानों को अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके अतिरिक्त, श्री चौहान ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) के तहत तेलंगाना में 2 लाख आवासों के निर्माण के लिए पहली किस्त मुख्यमंत्री को सौंप दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि केंद्र सरकार तेलंगाना को सभी क्षेत्रों में निरंतर सहयोग प्रदान करती रहेगी।


