राष्ट्रीय फेलोशिप योजना से मिली मदद, आर्थिक तंगी के बावजूद मंटू धर पूरा कर रहे पीएच.डी.
पश्चिम बंगाल के मंटू धर को राष्ट्रीय फेलोशिप योजना के तहत वित्तीय सहायता मिली है, जिससे वे अपनी आर्थिक कठिनाइयों को दूर कर शोध कार्य जारी रख पा रहे हैं।

सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की राष्ट्रीय फेलोशिप योजना अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में सशक्त बनाने का कार्य कर रही है। इसी योजना के माध्यम से पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर के रहने वाले 35 वर्षीय शोधार्थी श्री मंटू धर अपनी पीएच.डी. की पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।
फेलोशिप सहायता मिलने से पहले मंटू धर को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। उनका परिवार केवल एक सदस्य की कम आय पर निर्भर था, जिससे प्रवेश शुल्क, किताबों और शोध सामग्री जैसे आवश्यक शैक्षणिक खर्चों को पूरा करना कठिन था। इसके अतिरिक्त, परिवार में उच्च शिक्षा के अनुभव की कमी और संस्थान व पुस्तकालय की लंबी दूरी ने उनके शैक्षणिक सफर को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था।
वर्ष 2022 में मंटू धर को राष्ट्रीय फेलोशिप (NFC) योजना के तहत सहायता मिलना शुरू हुई। उन्हें अब तक फेलोशिप सहायता, मकान किराया भत्ता (HRA) और आकस्मिक अनुदान के रूप में कुल 2,96,186 रुपये प्राप्त हुए हैं। इस वित्तीय सहायता ने न केवल उनके परिवार का आर्थिक बोझ कम किया, बल्कि उन्हें किताबों और अध्ययन सामग्री जैसी आवश्यक शोध आवश्यकताओं को पूरा करने में भी मदद की।
अपनी यात्रा के बारे में श्री मंटू धर ने कहा, “एनएफसी की सहायता ने मुझे अपना शोध जारी रखने और अपने अकादमिक लक्ष्यों के करीब पहुंचने में मदद की।” वर्तमान में वे नए आत्मविश्वास के साथ अपनी पीएच.डी. की पढ़ाई जारी रखे हुए हैं और उनका लक्ष्य अपने शोध कार्य को सफलतापूर्वक पूरा करना है।

