भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब बड़े पैमाने पर उद्योग बनाने की ओर अग्रसर, ISM 2.0 पर रहेगा फोकस
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि भारत में पांच सेमीकंडक्टर प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो गया है और लक्ष्य 200 चिप डिजाइन कंपनियां विकसित करने का है।

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने 'सेमीकॉन इंडिया 2026' में घोषणा की कि भारत का सेमीकंडक्टर मिशन अब बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर उद्योग स्थापित करने की दिशा में बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 1.0 ने अपने छह साल के लक्ष्यों को मात्र चार वर्षों में ही पूरा कर लिया है। अब ISM 2.0 के माध्यम से एक पूर्ण सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
मंत्री श्री वैष्णव के अनुसार, ISM 2.0 छह मुख्य स्तंभों पर आधारित होगा, जिनमें डिजाइन, मटीरियल और मशीनें, अधिक फैब्स, अधिक एटीएमपी (ATMP) यूनिट्स, अनुसंधान एवं विकास (R&D) और प्रतिभा का विकास शामिल है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में पांच सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो चुका है, जो वैश्विक बाजार में लागत और गुणवत्ता के स्तर पर भारत की प्रतिस्पर्धा क्षमता को दर्शाता है। साथ ही, 2028 में शुरू होने वाले एक फैब की क्षमता का बड़ा हिस्सा पहले ही बुक किया जा चुका है।
डिजाइन क्षमता को भारत की एक बड़ी ताकत बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि ISM 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन कंपनियां उभरने का अनुमान है। उन्होंने बताया कि पहले चरण में 105 से अधिक चिप-डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स प्रदान किए गए और 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल फंडिंग मिली।
कौशल विकास के क्षेत्र में भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। शुरूआती 85,000 डिजाइन इंजीनियरों के लक्ष्य के मुकाबले चार वर्षों में लगभग 70,000 इंजीनियरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसके अलावा, लगभग 400 इंजीनियरिंग कॉलेजों के छात्रों को इंडस्ट्री-ग्रेड ईडीए टूल्स उपलब्ध कराए जा रहे हैं। ISM 2.0 के तहत अब ध्यान चिप डिजाइन से आगे बढ़कर सिस्टम डिजाइन पर होगा। उद्योग की बढ़ती मांग को देखते हुए एक लाख तकनीशियनों को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य को बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।
श्री वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एआई (AI) अनुप्रयोग आपस में जुड़े हुए हैं, जिससे एआई सर्वर के विनिर्माण में वृद्धि हो रही है। उन्होंने कहा कि भारत अब 'मेड-इन-इंडिया' और 'डिजाइन-इन-इंडिया' चिप्स की दिशा में बढ़ रहा है। वर्तमान में कुछ चिप्स का उपयोग रणनीतिक क्षेत्रों में हो रहा है और एटीएमपी इकाइयां जापान, स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों को निर्यात कर रही हैं।


