उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कैवल्यधाम में गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित किया
उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने योग शिक्षा के क्षेत्र में 75 वर्ष पूरे करने पर गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज को बधाई दी और योग को हर पीढ़ी के लिए प्रासंगिक बताया।

उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के लोनावाला स्थित कैवल्यधाम में गोर्धनदास सेकसरिया कॉलेज ऑफ योगा एंड कल्चरल सिंथेसिस के प्लेटिनम जुबली समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने योग शिक्षा, शोध और सांस्कृतिक सम्मिश्रण के प्रति समर्पित सेवा के 75 वर्ष पूरे करने पर कॉलेज को बधाई दी। उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि यह समय विशेष है क्योंकि कैवल्यधाम ने योग के क्षेत्र में समर्पित सेवा की एक सदी पूरी कर ली है।
वर्ष 1924 में कैवल्यधाम की स्थापना करने वाले स्वामी कुवलयानंद के योगदान को याद करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने उस समय योग के वैज्ञानिक अध्ययन की शुरुआत की जब इसे मुख्य रूप से एक रहस्यमय अभ्यास माना जाता था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अतीत की विरासत को संरक्षित कर आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए। उन्होंने कहा, "योग एक पीढ़ी के लिए नहीं है; यह आने वाली हर पीढ़ी के लिए है।"
श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने योग की वैश्विक स्वीकृति का जिक्र करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके प्रसार के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तकनीकी प्रगति और डिजिटल कनेक्टिविटी के कारण जीवन बहुत तीव्र हो गया है, ऐसे में योग हमें रुकने, ध्यान केंद्रित करने और स्वयं से पुनः जुड़ने का अवसर देता है। उन्होंने बताया कि योग मन और शरीर के बीच की दूरी को कम कर शारीरिक एवं मानसिक कल्याण को बढ़ावा देता है।
युवाओं को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के युवाओं में अपार ऊर्जा और प्रतिभा है, जिसे अनुशासन और जागरूकता के माध्यम से पूरी क्षमता में बदला जा सकता है। उन्होंने पतंजलि की 'चित्तवृत्ति रोकने' की अवधारणा पर चर्चा करते हुए कहा कि सूचनाओं की अधिकता के इस युग में मन को शांत रखने की क्षमता अत्यंत प्रासंगिक है।
इस कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने श्री ओ.पी. तिवारी द्वारा लिखित पुस्तक "योग एक्सप्लेन - लर्न फ्रॉम द मास्टर" का विमोचन भी किया। उन्होंने परिसर का भ्रमण कर छात्रों से बातचीत की और उन्हें योग के माध्यम से अनुशासन और आत्म-जागरूकता विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्वामी कुवलयानंद के दृष्टिकोण और सेठ माखनलाल सेकसरिया के योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
समारोह में महाराष्ट्र के राज्यपाल श्री जिष्णु देव वर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कैवल्यधाम ग्लोबल के अध्यक्ष श्री सुरेश प्रभु, सीईओ श्री सुबोध तिवारी, मुख्य संरक्षक श्री राकेश सेकसरिया सहित कई गणमान्य व्यक्ति, शिक्षक और छात्र उपस्थित थे।
